सौर ऊर्जा संयंत्रों की समस्या निवारण के लिए ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कई तरीकों से किया जाता है:
1. थर्मल इमेजिंग: यूएवी थर्मल कैमरों का उपयोग करके सौर पैनलों की अवरक्त छवियां लेते हैं। ये छवियां हॉट स्पॉट की पहचान करने में मदद करती हैं जो बाईपास डायोड या ओपन सर्किट थ्रेड जैसी समस्याओं का संकेत देती हैं।
2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से छवियों का विश्लेषण: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ड्रोन द्वारा ली गई छवियों का विश्लेषण करके स्वचालित रूप से विसंगतियों की पहचान करता है। यह विधि निरीक्षण समय और लागत को कम करने में मदद करती है और मैन्युअल निरीक्षण की तुलना में अधिक सटीक है।
3. भौगोलिक टैगिंग: ड्रोन द्वारा ली गई तस्वीरों में भौगोलिक टैग होते हैं जो दोषों के स्थान को सटीक रूप से पहचानने में मदद करते हैं। यह सुविधा रखरखाव टीमों को समस्या वाले क्षेत्रों तक जल्दी और सटीक रूप से पहुँचने में मदद करती है।
4. निरीक्षण समय में कमी: ड्रोन का उपयोग करके बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र का निरीक्षण कुछ घंटों में किया जा सकता है, जबकि मैन्युअल निरीक्षण में कई दिन लग सकते हैं